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Thursday, 1 January 2015

'न्यू ईयर' का 'रतजगा' - Happy New Year 2015 Poem in Hindi

by on 14:25

सुबह-सुबह जब आज जगा था
सर्दी से सूरज भी डरा था
कल की रात न सोये हम सब
'न्यू ईयर' का रतजगा था


 

ठंडी में खूब शोर मचाकर
बेसुरा गाना गा गाकर
'बीजी' थे सब फोन में ऐसे
जैसे 'एप्स' हों ज्ञान का सागर


 

जाने कौन-कौन थे लोगMore-books-click-here
फास्ट- फूड, पिज्जा का डोज
इंग्लिश, पंजाबी, भोजपुरी
'पीके' फिल्म के जैसा रोग


 

मुझे समझ तो कुछ न आया
न्यू ईयर कह कर भरमाया
दादी का त्यौहार है बढिया
कर्म, धर्म का 'मर्म' बताया


- मिथिलेश (1 जनवरी 2015 की शाम, नई दिल्ली)

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Happy New Year 2015 Poem in Hindi

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Monday, 3 November 2014

दादी तुम रहती क्यों दूर ... Bal Kavita by Mithilesh

by on 05:32

दादी - दादी मुझे पढ़ाओ,
ढेरों फिर तुम बात बताओ
खेलो दिन और रात मेरे संग
करूँगा तुमको जी भर के तंग


 

मम्मी सुबह जगाती है,
फिर मुझको नहलाती है,
रोता हूँ मैं जी भर लेकिन
दया उसे नहीं आती है.


 

Buy-Related-Subject-Book-beछोटा हूँ मैं घर में सबसे
बड़ी बड़ी किताबें हैं
करना चाहूँ बात मैं सबसे
ढेरों पास में बातें हैं


 

मम्मी, काकी करतीं काम,
खाना वही बनाती हैं
कंप्यूटर पर करतीं खिट-पिट
टीवी दिखा, सुलाती हैं


 

काका, पापा के आने पर
पास में उनके जाता हूँ
कहते हैं वह थके बहुत हैं
मन मसोस रह जाता हूँ


 

दादी तुम रहती क्यों दूर
समझ नहीं यह पाता हूँ
गर्मी की छुट्टी में ही क्यों
गाँव तुम्हारे आता हूँ.


 

वहां थे आयुष और अनुकल्प
दिल्ली में नहीं कोई विकल्प
साथ रहो या साथ ले चलो
दादी मानो यह संकल्प.


 

शुभकामनाओं सहित,
-मिथिलेश, उत्तम नगर, नई दिल्ली. (Bal Kavita by Mithilesh)

[caption id="attachment_228" align="alignnone" width="960"]Aaryansh-Dadi-Grand-Mother-Smt.-Meera-Devi आर्यांश अपनी दादी के साथ (Aaryansh with His Grandmother Smt. Meera Devi)[/caption]

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