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Wednesday, 29 April 2015

थैंक यू पापा - Thank You Papa, short story in hindi by Mithilesh

by on 10:45

जब मैंने पापा को 'थैंक यू' कहा तो वह भावुक हो गए.
उन्हें यह शब्द सुने कई साल हो गए थे शायद! हाँ, अपनी आर्मी की नौकरी में उन्होंने खूब 'थैंक यू' खूब सुना है. कभी खाली समय में वह अपने सूटकेस को खोलते हैं, तो उनके सर्टिफिकेट देखकर हैरानी होती है. एनसीसी के बेस्ट कैडेट से लेकर, बेस्ट टीम लीडर, बेस्ट मोटिवेटर, बेस्ट रेस्क्यू प्रबंधन से लेकर राष्ट्रपति तक के प्रशंसा पत्र उनके पास जमा थे. पर, अब उन्हें रिटायर हुए 10 साल हो चुके हैं.
मैं उनका छोटा बेटा एक इलेक्ट्रॉनिक्स मल्टीनेशनल में काम करता हूँ और मेरे बड़े भाइयों का अपना कारोबार है.
पढ़े लिखे होने के कारण पापा के हर काम में नुक्स निकालना हम भाइयों की आदत बन चुकी थी.
इस नुक्स निकालने में हम यह बात भूल जाते थे कि उन्होंने अपनी झोपडी से हमारे लिए महल तैयार करने में कितना कठोर संघर्ष किया होगा.
वैसे, पिताजी भी कम नहीं थे, और उन्होंने अपनी सर्विस के दौरान ही कई बीघे पुस्तैनी ज़मीन में घर बना दिया है. यही नहीं, आज भी जब उनकी पेंसन आती है तो उसमें इधर-उधर से जोड़ घटाकर वह कहीं न कहीं घर बनाने में लग जाते हैं. कुछ न सही तो कहीं तोड़कर ही वहां नए सिरे से निर्माण शुरू कर देते हैं. इस कड़ी में दूसरे जरूरी काम छूट जाते थे.
इसी बात पर घर के कई सदस्य उनसे नाराज रहते थे. लेकिन, यह उनका पैशन बन चूका था.
कई बार हमारा डिस्कसन करना उनको अपना अपमान लगता था, पर उनका काम ही ऐसा रहता था कि डिस्कसन हो ही जाती थी.
मुझे कंपनी के काम से कुछ महीनों के लिए देश से बाहर जर्मनी जाना पड़ गया. इस बीच मेरी प्रेग्नेंट पत्नी को मेडिकल प्रॉब्लम हुई. उस दौरान पापा ने तत्परता दिखाते हुए मेरी सारी चिंता दूर कर दी और गाँव में आवास होने के बावजूद सभी जरूरी ईलाज समय से हुए.
जर्मनी से जब मैंने फोन किया तो पापा के लिए अनायास ही 'थैंक यू' निकल गया.
अपनी भावुकता पर कंट्रोल करते हुए पापा ने दार्शनिक अंदाज में कहा 'थैंक यू' कहना है तो ऊपर वाले को कहो बेटे और फोन पर जोर-जोर से हंसने लगे. यह उनकी आदत थी.
मैंने उनके आदेशानुसार ऊपर वाले को भी कहा 'थैंक यू' !!
- मिथिलेश 'अनभिज्ञ'

Thank You Papa, short story in hindi by Mithilesh
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भूकम्प - Short story by Mithilesh Anbhigya on Earthquake in Hindi

by on 07:17

दूसरे की तकलीफ़ तुम्हें ज़रा भी समझ नहीं आती है, कभी किचेन में दो रोटियां बनाओ फिर एक हाउसवाइफ का दर्द पता चलेगा, रागिनी ने भड़कते हुए कहा!

उसका पति रमेश भी कहाँ कम था, ताना मारते हुए बोला- कभी हमारी तरह धूप में बाहर निकलो और ऑफिस की पॉलिटिक्स झेलो, तुम्हें भी आटे-दाल का भाव पता चल जायेगा.
उन दोनों की शादी को 5 साल होने को आये और इस तरह की नोक झोंक सप्ताह में एक बार हो ही जाया करती थी, कभी-कभी तो दो बार भी. आज namak-swadanusarभी शनिवार का दिन था और रमेश का हाफ डे था. दोनों के बीच बच्चे को स्कूल से लाने को लेकर किच-किच होती रहती थी, विशेषकर तब जब रमेश घर पर होता था.
अब पलंग क्यों हिला रहे हो?
मैं नहीं तुम हिला रही हो, रमेश ने आदतन तुरंत उत्तर दिया.
फिर ... ये ... हिल . ... ? ?
भू ... क ... म्प !!
भागिए.
रमेश अचकचा गया. हड़बड़ा कर उठा और शर्ट पहनने लगा.
छोड़िये शर्ट.. और उसका हाथ पकड़ कर रागिनी सीढ़ियों की ओर भागी.
तब तक बिल्डिंग हिलना बंद हो चुकी थी और सामने लगी टीवी पर नेपाल में आये भीषण भूकम्प की ब्रेकिंग-न्यूज आने लगी. 7.9 रिक्टर स्केल से दिल्ली भी अछूती न रह सकी थी. सैकड़ों, हज़ारों लोग मरे, घायलों की संख्या और नुकसान हुए मकानों के आंकलन आने लगे.
रागिनी और रमेश की साँसे अभी थमी नहीं थीं. यह दोपहर का ही समय था जब नर्सरी में पढ़ने वाले उनके बच्चे की छुट्टी होती है. रमेश बिना कहे, पास में स्थित स्कूल की ओर दौड़ा.
सब कुशल था.
रागिनी अपने बेटे को गोद में लेकर बैठी थी. रमेश ने माँ बेटे को गले लगा लिया. उधर टीवी पर भूकम्प की भयावहता का आंकलन लगातार बढ़ता जा रहा था.
- मिथिलेश 'अनभिज्ञ'

Short story by Mithilesh Anbhigya on Earthquake in Hindi

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